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नियम के पांच पà¥à¤°à¤•ार जोकि निज से ही संबंधित है. इसमें à¤à¤¸à¥‡ करà¥à¤®à¥‹à¤‚ के बारे में बताया गया है जो हमें खà¥à¤¦ की शà¥à¤¦à¥à¤§à¤¿ के लिठकरने होते हैं. नियम के पांच पà¥à¤°à¤•ार हैं- शौच, संतोष, तप, सà¥à¤µà¤¾à¤§à¥à¤¯à¤¾à¤¯ और ईशà¥à¤µà¤° पà¥à¤°à¤£à¤¿à¤§à¤¾à¤¨.
यम : इसमें सतà¥à¤¯ व अहिंसा का पालन करना, चोरी न करना, बà¥à¤°à¤¹à¥à¤®à¤šà¤°à¥à¤¯à¤¾ का पालन व जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ चीजों को इकà¥à¤•ठा करने से बचना शामिल है।
नियम : ईशà¥à¤µà¤° की उपासना, सà¥à¤µà¤¾à¤§à¥à¤¯à¤¾à¤¯, तप, संतोष और शौच महतà¥à¤µà¤ªà¥‚रà¥à¤£ माने गठहैं।
आसन : सà¥à¤¥à¤¿à¤° की अवसà¥à¤¥à¤¾ में बैठकर सà¥à¤– की अनà¥à¤à¥‚ति करने को आसन कहते हैं।
पà¥à¤°à¤¾à¤£à¤¾à¤¯à¤¾à¤® : सांस की गति को धीरे-धीरे वश में करना पà¥à¤°à¤¾à¤£à¤¾à¤¯à¤¾à¤® कहलाता है।
पà¥à¤°à¤¤à¥à¤¯à¤¾à¤¹à¤¾à¤° : इनà¥à¤¦à¥à¤°à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ को बाहरी विषयों से हटाकर आंतरिक विषयों में लगाने को पà¥à¤°à¤¤à¥à¤¯à¤¾à¤¹à¤¾à¤° कहते हैं।
धारणा : संसार की हर वसà¥à¤¤à¥ को समान समà¤à¤¨à¤¾ धारणा कहलाता है।
धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ : मन की à¤à¤•ागà¥à¤°à¤¤à¤¾à¥¤
समाधि : इस दौरान न वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿à¤¦à¥‡à¤–ता है, न सूंघता है, न सà¥à¤¨à¤¤à¤¾ है व न सà¥à¤ªà¤°à¥à¤¶ करता है।
लाठहैं कई -
योग से मसà¥à¤¤à¤¿à¤·à¥à¤• शांत होता है जिससे तनाव कम होकर बà¥à¤²à¤¡ पà¥à¤°à¥‡à¤¶à¤°, मोटापा और कोलेेसà¥à¤Ÿà¥à¤°à¥‰à¤² में कमी आती है। मांसपेशियां मजबूत होती हैं। नरà¥à¤µà¤¸ सिसà¥à¤Ÿà¤® में सà¥à¤§à¤¾à¤° होता है। शरीर की रोगों से लड़ने की ताकत में इजाफा होता है। जिससे आप बार-बार बीमार नहीं पड़ते।
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